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परिचय

विकास पुरुष की ध्येय यात्रा।

ग्रामीण क्षेत्र हो या शहरी क्षेत्र श्री मधु वर्मा की स्वीकार्यता समाज में प्रत्येक जाती, पंथ और वर्गों में सदैव बनी रही है। वर्ष 1970 में श्री वर्मा ने जनसंघ के सक्रीय कार्यकर्ता के रूप में राजनीती के क्षेत्र में पदार्पण किया जिसके बाद उन्होंने सन 1974 से 1983 तक इंदौर की छात्र राजनीती में भी अपनी सक्रिय भूमिका निभाई

1983 में संगठन ने श्री मधु वर्मा पर भरोसा कर उन्हें नगर निगम के चुनाव में वार्ड क्रमांक 56 से पार्षद पद के प्रत्याशी के रूप में उतारा और उनकी सफलता की यह यात्रा तब से ही अनवरत गतिमान होती रही। इसके बाद से नगर निगम के चुनाव जीतना मानो श्री वर्मा की आदत सी हो गई। 1993 में राऊ विधानसभा के राजेंद्र नगर से पार्षद रहते हुए उन्होंने क्षेत्र का कायाकल्प किया साथ ही कई विकासकार्यों से राऊ की जनता के दिलों में अपनी जगह बनाई।

नगर निगम में कई बार पार्षद रहने के बाद सन 2003 में श्री मधु वर्मा को संगठन ने इंदौर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष का बड़ा दायित्व सौंप दिया जिस पर वे खरे भी उतरे और उनके इस छः वर्ष के स्वर्णिम कार्यकाल में इंदौर स्मार्टसिटी बन कर उभरा। श्री वर्मा यहां ही नहीं रुके, सन 2012 में उन्हें पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष का दायित्व भी मिला जिसका निर्वहन उन्होंने पूरी ईमानदारी और लगन के साथ किया।

इसी के साथ श्री वर्मा भाजपा संगठन को सक्षम और स्वावलम्बी बनाने के महत्वपूर्ण उपक्रम आजीवन सहयोग निधि संग्रह के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे रहे। 1973 से लेकर आज दिनांक तक ऐसा कोई विधानसभा, लोकसभा, नगर निगम या पंचायत का चुनाव नहीं रहा है जिसमे श्री वर्मा ने अपनी पूरी ताकत झोंक पार्टी को विजय दिलाने में अपना योगदान न दिया हो।

चाहे जनता के प्रतिनिधि बन विकास कार्य को गति देना हो या संगठन द्वारा मिले कार्यभार को संभाल संगठन को गढ़ने की दिशा में कार्य करना हो। दोनों ही जगह श्री मधु वर्मा ने अपनी कर्मठता और कार्य के प्रति दृढ़ संकल्प को परिभाषित करने में कोई कोई कसर नहीं छोड़ी है। यही कारण है की आज वे संगठन में हर किसी के चहेते हैं।

वहीं दूसरी और पार्षद रहते हुए या आई डी ए की अध्यक्षता वाले कार्यकाल में किये गए कार्य जैसे झुग्गीवासियों को मकान उपलब्ध कराना, नवीन कलेक्टोरेट का उन्नयन, चौराहों का सौंदर्यीकरण, BRTS का शुभारम्भ, सुपर कॉरिडोर का निर्माण, रीजनल पार्क जैसी सैंकड़ो सौगाते श्री मधु वर्मा ने इंदौर को दी है। यही कारण है की आज श्री मधु वर्मा के नाम से राऊ ही नहीं इंदौर का बच्चा – बच्चा वाकिफ है।

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